भारत माँ को सपूत चाहिए
सीमा पर बलदूत चाहिए
जिसको न हो प्राण की चिंता
धरती हो माता सूरज हो पिता
लाखों में हो अलग कदावर,
तन-मन-धन जो करे न्योक्षावर
दुश्मन को जो सबद सिखाये
ऐसा ही जमदूत चाहिए |
भारत माँ को सपूत चाहिए
रोक सके जो जात-पात को
कौम की झगरा क्षेत्रवाद को
बंद करे जो भाई भतीजावाद को
मिटा सके जो आतंकवाद को
कौरव को जो धुल चटाए,
ऐसा ही मारुति चाहिए
भारत माँ को सपूत चाहिए |
हरियाली जो फैलाये खेतों में
गम बदल दे किसानो को खुशी में
हरपाल हो खेतों की सिचाई
ना हो बिजली की कभी रुलाई
चारो तरफ जो अन्न बरसाए
ऐसा ही अन्नदुत चाहिए
भारत माँ को सपूत चाहिए
अशिक्षा से जो करे लडाई
मिटा सके जो रुढी बुराई
पढ़ा सके जो अनपढ़ को पाठ
दिला सके जो शिक्षा का गाठ
मूर्खो को जो ज्ञानी बनाये
ऐसी विद्या की दूत चाहिए
भारत माँ को सपूत चाहिए
अछुन्न रखे जो देश की संस्कृति
मिटा सके जो पशिचमी विकृती
दिला सके जो बुजुर्गो को सम्मान
नाडी का न हो अपमान
लाल किला पर जो झंडा फहराये
ऐसा ही कर्मनिष्ट चाहिए
भारत माँ को सपूत चाहिए
दयाकान्त
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